मछुआरे का बेटा
क्या वह तूफ़ान आने पर लौटे या बड़ी मछली के पीछे जाए।
Beginning
अरुण एक छोटे से गाँव में रहता था। यह गाँव समुद्र के पास था। उसके पिता एक मछुआरे थे। हर सुबह पिता नाव लेकर समुद्र में जाते थे। शाम को वे मछली लेकर लौटते थे। अरुण बारह साल का था। वह भी मछुआरा बनना चाहता था।
आज एक खास दिन था। पिता बीमार थे। वे बिस्तर पर लेटे थे। माँ चिंता में थी। घर में पैसे कम थे। अरुण ने सोचा, "आज मैं अकेले समुद्र में जाऊँगा। मैं मछली पकड़ूँगा।"
माँ ने कहा, "बेटा, तुम अभी छोटे हो। समुद्र खतरनाक है।" लेकिन अरुण ने कहा, "माँ, मैं ध्यान रखूँगा। मैं जल्दी लौट आऊँगा।" पिता ने धीरे से कहा, "ठीक है, बेटा। पर एक बात याद रखो। हमेशा किनारे के पास रहो। और अगर आसमान काला हो जाए, तो तुरंत लौट आओ।"