TellAria

बाज़ार में खो गया

क्या वह घबरा कर रोए या समझदारी से रास्ता ढूँढे।

Beginning

शनिवार की दोपहर थी। आरव अपनी माँ के साथ शहर के बड़े बाज़ार में आया था। बाज़ार में बहुत भीड़ थी। लोग आ-जा रहे थे, और दुकानदार ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ लगा रहे थे। "ताज़े फल लो! मीठे आम लो!" एक दुकानदार चिल्ला रहा था।

आरव आठ साल का था। उसे बाज़ार बहुत पसंद था, क्योंकि यहाँ हर तरफ़ रंग-बिरंगी चीज़ें थीं। एक तरफ़ कपड़ों की दुकानें थीं, और दूसरी तरफ़ खिलौनों की। माँ ने उसका हाथ पकड़ा हुआ था।

"आरव, मेरे पास रहो," माँ ने कहा। "यहाँ बहुत भीड़ है। मेरा हाथ मत छोड़ना।"